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8- विद्यापति: पद

Hindi · Class 12

यह कार्यक्रम हिन्दी भाषा के कवि विद्यापति की सुप्रसिद्ध रचना पद पर आधारित है। इस पाठ्‌यपुस्तक में विद्यापति के तीन पद लिए गए हैं। पहले में विरहिणी के हृदय के उद्‌गारों को प्रकट करते हुए उन्होंने उसको अत्यंत दुखी और कातर बताया है। दूसरे पद में प्रियतमा सखि से कहती है कि मैं जन्म-जन्मांतर से अपने प्रियतम का रूप ही देखती रही पंरतु अभी तक नेत्र संतुष्ट नहीं हुए हैं। तीसरे पद में कवि ने विरहिणी प्रियतमा का दुखभरा चित्र प्रस्तुत किया है।