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9- कबीर : अरे इन दोहुन राह न पाई ; बालम, आवो हमारे गेह रे
Hindi · Class 11
पाठ्यपुस्तक में कबीर के दो पद ‘अरे इन दोहुन राह न पाई; बालम, आवो हमारे गेह रे’ दिए गए हैं। पहले पद में हिंदू और मुसलमान दोनों के धर्माचरण पर प्रहार करते हुए बाह्याडंबरों और कुरीतियों की आलोचना की गई है। दूसरे पद में कबीर ने खुद को विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रियतम से घर लौटने की आकांक्षा व्यक्त की है।